top of page
  • sandeep kumar verma

स्त्रियों के लिए कितनी महान थी हमारी मनुवादी संस्कृति? और उसे संविधान और ओशो ने कितना बदला?

भारतीय संविधान के रचयिता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

सभी लड़कियां और महिलाएं विशेष ध्यान दें। यह महज़ संयोग नहीं है कि मनुस्मृति को अंबेडकर द्वारा 25 दिसंबर के दिन जलाया गया, बल्कि इतिहास में स्त्री और निचले तबके के लोगों के लिए आध्यात्मिक मार्ग अपनाकर अपने भीतर के सत्य को पाने का मार्ग जीसस क्राइस्ट ने ही खोला था।जीसस के पहले तक सिर्फ़ उच्च वर्ग या कुलीन परिवार के पुरुष लोग ही शिक्षा और अध्यात्म के द्वारा सत्य के प्राप्ति कर पाये। जीसस के बाद राबिया, मीरा, लैला, सहजो और दयाबाई इत्यादि स्त्रियों ने आत्मज्ञान को प्राप्त कर कई पुरुषों को भी आत्मज्ञान के लिए mentoring किया।

फ़ेसबुक पर एक पोस्ट के आधार पर

भारत में आज नारी 18 वर्ष की आयु के बाद ही बालिग़ अर्थात विवाह योग्य मानी जाती है। परंतु मशहूर अमेरिकन इतिहासकार कैथरीन मायो (Katherine Mayo) ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक “मदर इंडिया” (जो 1927 में छपी थी) में स्पष्ट लिखा है कि भारत का रूढ़िवादी हिन्दू वर्ग नारी के लिए 12 वर्ष की विवाह/सहवास आयु पर ही अडिग था।

1860 में तो यह आयु 10 वर्ष थी। इसके 30 साल बाद 1891में अंग्रेजी हकुमत ने काफी विरोध के बाद यह आयु 12 वर्ष कर दी। कट्टरपंथी हिन्दुओं ने 34 साल तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं होने दिया। इसके बाद 1922 में तब की केंद्रीय विधान सभा में 13 वर्ष का बिल लाया गया। परंतु धर्म के ठेकेदारों के भारी विरोध के कारण वह बिल पास ही नहीं हुआ।

भारत एक खोज का एक eposiode इस दिशा में ज्योतिराव फुले के 1973 में किए गए महान प्रयत्न पर आधारित है जिससे उस समय के भारत में महिलाओं की स्थिति, शिक्षा तथा अन्य समस्याएँ और भी स्पष्ट होती है।

1924 में हरीसिंह गौड़ ने बिल पेश किया। वे सहवास की आयु 14 वर्ष चाहते थे।

इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध पंडित मदन मोहन मालवीय ने किया, जिसके लिए ‘चाँद’ पत्रिका ने उनपर लानत भेजी थी।

अंत में सिलेक्ट कमेटी ने 13 वर्ष पर सहमति दी और इस तरह 34 वर्ष बाद 1925 में 13 वर्ष की सहवास आयु का बिल पास हुआ।

6 से 12 वर्ष की उम्र की बच्ची सेक्स का विरोध नहीं कर सकती थी उस स्थिति में तो और भी नहीं, जब उसके दिमाग में यह ठूस दिया जाता था कि पति ही उसका भगवान और मालिक है। जरा सोचिये! ऐसी बच्चियों के साथ सेक्स करने के बाद उनकी शारीरिक हालत क्या होती थी? इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला वर्णन Katherine Mayo ने अपनी किताब “Mother India” में किया है कि किस तरह बच्चियों की जांघ की हड्डियां खिसक जाती थी, मांस लटक जाता था और कुछ तो अपाहिज तक हो जाती थीं।

6 और 7 वर्ष की पत्नियों में कई तो विवाह के तीन दिन बाद ही तड़प तड़प कर मर जाती थीं। स्त्रियों के लिए इतनी महान थी हमारी मनुवादी संस्कृति। अगर भारत में अंग्रेज नहीं आते तो भारतीय नारी कभी भी उस नारकीय जीवन से बाहर आ ही नहीं सकती थी।

Ladies, your duties per Shiva Purana, Rudra Samhita, Parvati Khanda 54.25

संविधान बनने से पहले साधारण स्त्रियों का कोई अधिकार नहीं था। मनुस्मृति के अनुसार बचपन में पिता के अंडर, जवानी में पति की दासी और बुढ़ापे मे बेटे की कृपा पर निर्भर रहती थी। बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने संविधान मे इनको बराबरी का दर्जा दिया। संपत्ति का अधिकार, नौकरी में बराबरी का अधिकार, ये सब बाबा साहब की देन है।

आप सैकड़ों या हज़ारों साल से देवी की पूजा करती हैं। आपकी आस्था और भक्ति का सम्मान है। पर भारत में महिलाओं को —

  1. सती होकर जलाए जाने से आज़ादी 1829 में मिली।

  2. लड़कियों का पहला स्कूल सावित्री बाई फूले और फ़ातिमा शेख ने 1848 में खोला।

  3. 1856 में विधवाओं को फिर से विवाह का अधिकार मिला।

  4. बेटियों की हत्या को 1870 में अपराध माना गया।

  5. महिलाएं भी तलाक़ दे सकती हैं, ये अधिकार 1955 में मिला।

  6. हिंदू औरतों को बहुपत्नी प्रथा से छुटकारा 1955 में मिला।

  7. पैत्रिक संपत्ति में अधिकार 1956 में मिला।

  8. लड़कियों को देह व्यापार में धकेलना 1956 में अपराध घोषित हुआ।

  9. समान वेतन क़ानून 1976 में बना।

आज़ादी के बाद महिलाओं को मिले ज़्यादातर अधिकार बाबा साहब के ड्राफ़्ट किए हुए हिंदू कोड बिल से निकले हैं। फिर भी मैं आपकी आस्था और भक्ति का सम्मान करता हूँ।

ये सन्देश उन महिलाओं के लिए, जो कहती है कि बाबा साहेब ने कुछ नहीं किया। आपने इसे ध्यान से पढ़ा इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

मेरा कॉमेंट:

और मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि यदि भाजपा पूरे देश पर शासन करने में सफल होती है तो जिस प्रकार सहयोगी दलों को वह खाती जा रही है, नष्ट करती जा रही है उसी प्रकार जब उसे महिलाओं की ज़रूरत नहीं रह जाएगी तो वह अब तक की उनकी सभी महिलाओं पर भी वही पुरानी मनुस्मृति ज़रूर लाग